Saturday, April 10, 2021
भारतीय दूध उघोग
भारतीय दूध उद्योग के कुछ तथ्य -
1. दूध उद्योग नर बछडे़ को रास्ते पर छोड़ देते है या तो उन्हें कत्लखाने भेज देते है -
लिंग असंतुलन सांख्यिकी (Livestock Census 2012)
भैंस: 15% नर, 85% मादा (भारत में 55% दूध का उत्पादन भैंस से आता है )
गाय: 35% नर और 65% मादा (42% दूध का उत्पादन गाय से आता है )
2. बछड़ों को अपनी माँ से अलग कर दिया जाता है -
2017 में FIAPO ने 451 दूध डेयरी के अध्ययन में ये सामने आया कि 24% बछड़े पैदा होते ही हमेशा के लिए अपनी माँ से अलग कर दिए जाते है|
3. जबरन गर्भवती / यौन शोषण करना -
गाय/भैंस अपने बछड़े के जन्म के बाद केवल 8-12 महिने के लिए दूध देते हैं। दूध की निरंतर सप्लाई के लिए, बछड़े के पैदा होने के दो महीने बाद ही दूधवाले उन्हें फिर से जबरन गर्भवती करते है ताकि वे फिर से नए बछड़े को जन्म दे सके 9 महीने के बाद| उन्हें कृत्रिम तरीकों से या जबरन सांड को उन पर चढ़ाके गर्भवती किया जाता है|
Ministry of Agriculture and Farmer’s Welfare Data के अनुसार 2015-16 में भारत के 54% (1305 लाख जानवरों में से 704 लाख जानवर) प्रजनन योग्य गायों/भैसों को कृत्रिम तरीके से गर्भवती किया गया था|
4. बछड़ों को अपनी मां के दूध से वंचित कर दिया जाता है -
गाय का दूध उसके बछड़ों के लिए है, ना कि मनुष्य के लिए। प्राकृतिक तौर पर बछड़े 9-12 महीने के लिए अपनी मां का दूध पीते है|
FIAPO के 2017 में किये अध्ययन में सामने आया कि 451 दूध डेयरी के सर्वेक्षण में से 74 % दूध डेयरी ऐसे है जिन्होंने बछड़े से तीन महीने या उससे कम समय में ही दूध छुड़वा दिया|
5. ऑक्सीटॉसिन -
FIAPO के 2017 में किये गए अध्ययन में सामने आया की सर्वेक्षण किये गए दूध उद्योग में से 47% दूध उद्योग ऐसे है जो अवैध और अविवेकी तरीके से ओक्सीटोक्सिन का उपयोग करते है. जब हार्मोनल इंजेक्शन दिया जाता है, गाय/भैंस को पेट में घंटों तक बहुत दर्द होता है जो प्रसव पीड़ा के समान है|
6. मशीन से दूध निकालना –
मशीन से दूध निकालना बहुत ही पीड़ादायक है और इसके कारण गाय/भैंस के थन लाल हो जाते है और सूजन भी हो जाती है| उनके थनों को नुकसान पहुंचता है और इसके कारण उन्हें पीड़ादायक मस्तीतिस जैसी बिमारी भी हो जाती है|
Rishibhai Jain
7. सींग निकालना और कली निकालना (disbudding) –
इस क्रिया के दौरान और इस क्रिया के बाद भी गाय/भैंस को बहुत दर्द सहन करना पड़ता है| पशु चिकित्सकों द्वारा भी कोई संज्ञाहरण (anaesthesia – जिससे दर्द ना हो) नहीं दिया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि जब उनके साथ दुर्व्यवहार हो और पीटा जा रहा हों तब वे वापस लड़ ना सके।
8. नाक को रस्सी से खींचना या घुमाना –
गाय/भैंस के नाक को रस्सी से खींचना या घुमाने से उनके बहुत ही संवेदनशील नाक के ससपेटम पर दबाव बनता है| इसके कारण उन्हें बहुत पीड़ा होती है जिससे उनके मालिक के लिए उनपर शासन करना आसान हो जाता है.
नाक में छेद से शूरति दर्द के उपरांत, उन्हें जीर्ण (chronic) दर्द भी होता है और चोट भी लगती है. हाल ही में हुए अध्ययन के अनुसार, 62% गाय/भैसों को नाक में मामूली गंभीर चोटें देखी गईं है। 3% गाय/भैसों में घाव से लगातार खून बहता और 44% में मवाद वहाव पाया गया|
9. समयपूर्वमृत्यु (प्राकृतिक जीवन के पहले ही मृत्यु) –
गायों/भैसों का प्राकृतिक जीवन लगभग 20-25 साल है। 4-7 साल की उम्र में गाय/भैंस लगातार निरंतर दुर्व्यवहार के कारण पर्याप्त दूध देना बंद कर देती हैं। ऐसी स्थिति पर, उनका पोषण करना कोई लाभदायक नहीं है और इसलिए उन्हें सड़को पर छोड़ दिया जाता है या कत्लखाने में बेच दिया जाता है।
कत्लखाने भेजते समय उन्हें बहुत सारी संख्या में ट्रक में ठसाठस भर दिया जाता है| यह दु:खद यात्रा काफी दिनों तक चलती है और अंत में कत्लखानो में उन्हें मार दिया जाता है|
सफ़ेद रेवोल्यूशन (दुग्ध क्रांति) ही पिंक रेवोल्यूशन (मांस क्रांति) का कारण है।
भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसका मतलब यह भी है कि भारत बीफ (गौ/भैंस मांस) का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक(exporter) है और दुनिया में चमड़े का 5th पाँचवा सबसे बड़ा उत्पादक बनने का कारण है, जो पर्यावरण प्रदूषण मुख्यता जल प्रदूषण (उदाहरण के लिए गंगा नदी प्रदूषण) के साथ अन्य प्रदूषण का भी मुख्य कारण है।
ये बात समझे कि मनुष्यों को जीवित रहने के लिए दूध की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे वनस्पति से अपने सभी पोषण प्राप्त कर सकते हैं। वास्तव में, प्रकृति में कोई जानवर स्वाभाविक रूप से अन्य प्रजातियों का दूध पीता ही नहीं है।
आप दुधारू वस्तुओं के विकल्प में मूंगफली, नारियल, बादाम, सोया, इत्यादि का दूध बना सकते है
यह 12 मिनट की डोक्यूमेंट्री जरूर देखे :
https://www.youtube.com/watch?v=30bCIsh3oh8
जियो और जीने दो।
वीगन (पूर्ण शाकाहारी) बने।
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