Sunday, April 18, 2021
◆ गिरगिट का अस्तित्व खतरें में
◆गिरगिट (Chameleon) का अस्तित्व खतरें में ◆
बढ़ते प्रदूषण व व्यापक रूप से जंगलों की कटाई से पर्यावरण पर इसका व्यापक असर पड़ रहा हैं और इसी के कारण मौसम का मिजाज भी जलवायु परिवर्तन में सहायक हो रहा हैं। लगातार परिवर्तन हो रहे मौसम व जलवायु पर पड़ रहा हैं, जिससे इनकी प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्त के कगार पर पहुंच गई हैं। विलुप्त होते प्रजातियों में सबसे बड़ा खतरा वर्तमान किसानों को मित्र के रूप में पहचानें जाने वाले विरल प्रजाति का रंग बदलने वाला बड़ा गिरगिट अब अपने अस्तित्व को बचाने संघर्ष कर रहा हैं।
सामान्य गिरगिट से बड़ा व गोल से छोटा यह विरल प्रजाति का रंग बदलने वाला गिरगिट, एक समय था कि जब जिले के कोलाबीरा, लैयकरा, किरमिरा ब्लाक में सैकड़ों की संख्या में नजर आते थे। विरल जाति के गिरगिट खेतों व खलिहानों में फसल में लगने वाले कीड़े, कीट को चटकार, खा जाते थे। इनके इसी गुणों के कारण इन्हें किसानों का मित्र भी कहा जाता था मगर अस्वाभाविक रूप से जलवायु परिवर्तन से जैव विविधता संकट में पड़ गई है और इस परिवर्तन मे ताल से ताल मिलाकर नही चल पा रहे अनेक विरल जाति के पक्षी व अन्य जीव जंतुओं का वंश पृथ्वी से तेज गति से विलुप्त होती जा रही हैं। विरल जाति का गिरगिट एक बार में सात रंग बदलता था। इसमें औषधि गुण होने से इसकी विशेषता अन्य गिरगिटों से कहीं अधिक है। इसी कारण इसको पकड़ने व इसकी हत्या करने से भी लोग पीछे नहीं हटते। वही विलुप्त के कगार में पहुंच चुके रंग बदलने वाले औषधि गुण से युक्त उक्त गिरगिट की प्रजाति की सुरक्षा के साथ इनके संरक्षण किए जाने की बात अंचल वासियों द्वारा कही जा रही हैं।
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