Sunday, April 4, 2021

कौनसा जानवर वयस्क होने के बाद भी दूध पीता हैं?

पश्न - कौनसा जानवर वयस्क होने के बाद भी दूध पीता है? इन्सान के अलावा कोई नहीं। हाहा!! दूध एक प्राकृतिक शिशुआहार है और सिर्फ इन्सान के अलावा सारे जानवर प्रकृति के नियमों का पालन करते हैं। मुझे एक जानवर का नाम बताएं जो कि किसी अन्य प्रजाति का दूध पीता है। कोई नहीं! वास्तव में प्रकृति ने हर प्रजाति की माँ का दूध उसी प्रजाति के बच्चे की जरुरत के हिसाब से बनाया है। कुत्ते के दूध में सिर्फ कुत्ते के बच्चे के लिए पोषण होता है, बिल्ली के दूध में बिल्ली के बच्चे के लिए, चूहे के दूध में उसके बच्चे के लिए, हाथी के दूध में हाथी के बच्चे के लिए, इत्यादि। इसी तरह A1 गाय का दूध A1 बछड़े के लिए, A2 दूध A2 बछड़े के लिए होता है। जर्सी गाय का दूध सिर्फ जर्सी गाय के बच्चे के लिए और होलस्टन गाय का दूध उसी की बच्चे के लिए। और इंसान का दूध भी इंसान बच्चे के लिए प्रकृति ने बनाया है। एक नवजात इंसान के बच्चे का वज़न कितना होता है और एक वर्ष बाद उसका वज़न कितना हो जाता है? एक इंसान के नवजात बच्चे का औसत वज़न ३ किग्रा. होता है और एक वर्ष बाद लगभग ७-१० किग्रा. तक हो जाता है। एक नवजात गाय/भैंस के बच्चे का वज़न कितना होता है और एक वर्ष में कितना हो जाता है? गाय/भैंस के नवजात बच्चे का औसत वजन १५-२५ किग्रा. तक होता है और एक वर्ष में १३०-१४० किग्रा तक पहुँच जाता है। जब किसी जानवर के बच्चे के दांत आ जाते हैं तो प्रकृति क्या संकेत देती है? और उसके शरीर में किस तरह के बदलाव आने लगते है? किसी बच्चे के दांत आना एक स्पष्ट संकेत है कि अब वह अपना भोजन चबा सकता है और अर्ध-ठोस/ठोस आहार ले सकता है, उसे तरल आहार की जरुरत नहीं है। इसी कारण बच्चे के अंदर धीरे धीरे लेक्टेस एंजाइम बनना बंद हो जाता है। यह एंजाइम दूध को पचाने में सहायक ही नहीं लेकिन आवश्यक होता है। इसीलिए अगर आप बड़े होने के बाद लेक्टोस को नहीं पचा सकते तो यह एक सामान्य बात है। वास्तव में सभी इंसान प्राकृतिक रूप से लेक्टोस को पचाने में असमर्थ होते हैं, और दूध पीने के बाद पेट फूलना, उल्टी होना, दस्त लगना, इत्यादि स्पष्ट संकेत हैं कि शारीर अब दूध में उपस्थित शर्करा (लेक्टोस) को पचाने में असमर्थ है। उसके बाद भी नियमित रूप से दूध का सेवन करने से शरीर में कई रोग जैसे उच्च-रक्तचाप, मधुमेह, ह्रदय-रोग, हड्डियाँ कमज़ोर होना, मुहांसे इत्यादि होने लगते हैं, यह सब दूध में उपस्थित संतृप्त वासा, कोलेस्ट्रॉल, होरमोन आदि के कारण उत्पन्न होते हैं। अगर इन्सान का 3-4 साल का बच्चा इंसान का दूध नहीं पचा सकता तो क्या आप सोच सकते हैं वो गाय/भैंस का दूध कैसे पचा सकता है जो कि गाय के बछड़े को एक साल में २० किग्रा से १३० किग्रा. तक बना देता है? आशा है आप का जवाब “नहीं” होगा। क्या आप सोचते हैं कि गाय/भैंस लगातार आजीवन दूध देती रहती है? जबकि प्रकृति में हर माँ का दूध कम होने लगता है, जब उसके बच्चे के दांत आने लगते हैं। वास्तव में बच्चा होने के ३ महीने बाद ही गाय/भैंस का योन शोषण होता है और एक इंसान कोहनी तक अपना हाथ उसकी गुदा में डाल कर एक नली की सहायता से उसकी योनी में नर का वीर्य डालता है जो कि उस गाय के लिए बहुत ही कष्टदायक और दर्दनाक होता है। इस तरह जो दूध आप पीते हैं वह उस गाय का होता है जो दूध देने के साथ-साथ गर्भवती भी होती है और गर्भवती होने के कारण उसके शरीर में कई तरह के होर्मोनल बदलाव होते हैं। और वह होरमोन उससे निकाले जाने वाले दूध और उसके मूत्र में भी आ जाते हैं। जब आप इस तरह के दूध का सेवन करते हैं तो यह होरमोन आपके शारीर में भी पहुँच जाते हैं। यही कारण है कि आजकल के बच्चों में ८-१० साल की मासूम उम्र में ही किशोरावस्था के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

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