Sunday, June 20, 2021

वीगन (Vegan) का क्या अर्थ हैं?

वीगन ( vegan ) का क्या अर्थ है ? वीगन का अर्थ है वह व्यक्ति जो विशेष रूप से खाने पीने में सभी प्रकार के पशु उत्पादों का इस्तेमाल नहीं करता । जैसे जानवरों का गोश्त , दूध व दूध से बने उत्पाद । एक वर्ग तो चमड़े की वस्तुओं का प्रयोग भी नहीं करता । यह संसार समस्त जीवों के रहने के लिए बना है लेकिन मनुष्य ने सबसे ताक़तवर और बुद्धिमान होने के नाते अपनी क्षमताओं का दुरुपयोग कर प्रकृति और समस्त जीवों का दोहन करना शुरू कर दिया और नैतिकता की परिभाषा भी मानव कल्याण तक सीमित रखी । जो हमें ठीक लगा बस वही नैतिक है । माँसाहार और दुग्धाहार दोनों को अनैतिक नहीं माना , तर्क ये दिया जाता है कि हमारे जीवित और स्वस्थ रहने के लिए यह ज़रूरी है । ये तर्क survival of the fittest को सही मानता है । क्या हमने कभी सोचा है कि इसी सिद्धांत को मानते मानते हमने मनुष्यों का भी इस्तेमाल और शोषण शुरू कर दिया है । अगर हम जानवरों , प्रकृति और पेड़ पौधों का शोषण करना सही मानते हैं तो इसकी तार्किक परिणति ( logical end ) मनुष्यों के शोषण में ही होगी । जब हमने जानवरों को जीव ना समझ कर संपत्ति या वस्तु समझा तो सारे समाज ने इसे स्वीकार कर लिया लेकिन ये व्यवस्था आगे बढ़ी और पुरुषों ने महिलाओं को , अमीरों ने ग़रीबों को , बड़ों ने बच्चों को , गोरों ने कालों को , ऊँची जाति वालों ने तथाकथित निचली जातियों को वस्तु समझना ( commodification ) शुरु कर दिया । माँसाहार के विरुद्ध तर्कों से तो सब परिचित हैं । दूध पीने के विरोध में वीगन तर्क ये हैं : 1. दूध पर पशु के बच्चे का हक़ है जिस तरह मानव के बच्चे का माँ के दूध पर है । 2. दूध निकालने की प्रक्रिया में पशु की कोई सहमति नहीं होती , ये उसके साथ ज़बरदस्ती है , ये प्रक्रिया पशु के लिए पीड़ादायी भी है क्योंकि पहले उसके बच्चे को थन के पास लाया जाता है और जब दूध उतर जाता है तो बच्चे को खींचकर माँ से अलग कर देते हैं और दूध निकाल लेते है । 3. कुछ वीगन जैसे मेनका गाँधी दूध को मांसाहार की श्रेणी में रखते हैं । 4. मानव पशु को संपत्ति की श्रेणी में रखता है जो जीव के प्रति हिंसक व्यवहार है ।

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