Wednesday, June 9, 2021

देहदान महादान

हमारा प्रथम कर्तव्य तो यही होना चाहिए कि हम हमारे परिवारजनों को हमारी इच्छा के बारे में बताते हुए जागृत करते रहे पंरतु हम उन्हें समझाने में नाकायाब रहे और कहीं हम बीच में चल बस या बहोत जागृत करने के बाद भी परिवारजन हमारे इच्छा की कद्र ना करते हुए मरणोपरांत हमारे मृत शरीर को जला देगे तथा देहदान ,अगंदान न करेगे ..., इसलिए यह वसीयत नामा ( इच्छा पत्र ) है जिसमे है की यदि मेरा प्राकृतिक देंहात होता है और घर वाले मेरी इच्छा की कद्र ना करते हुये देहदान व अगंदान ना करे तो कानून उसमे हस्तक्षेप करके देहदान , अगंदान करवा सकता है ..., इस वास्ते मेरे तमाम नजदीक मित्रों से निवेदन है कि मेरे देंहात के बाद यदि परिवारजन देहदान न करे तो आप कानून को सूचित करे । एक देह दान से 8 लोगो की जिंदगियां बचाई जा सकती है। हर दिन लगभग 20 लोगो की मृत्यु होती है जिन्हें शरीर का ऑर्गन नहीं मिलता। हमारे देश मे 10 लाख लोग कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के इंतजार में बैठे है, 2,20,000 लोगो को किडनी की जरूरत है। और हमारे देश मे अंग दान या देह दान करने वालो की संख्या बहुत ही ज्यादा कम है। सोचिए आपके जाने के बाद भी आपके शरीर से कुछ और लोग जीवित रह सकेंगे। हमारे ग्रुप के बहुत ही युवा, Mahendra Singh जी जो मात्र 20 वर्ष के है उन्हें ये इंसानियत समझ मे आयी और देह दान रजिस्टर करा दिया। उनका देहदान पेपर में भी निकला, उन्होंने बताया कि वो अन्धविस्वास छोड़ कर समाज की भलाई के लिए ये कदम उठाया। उन्होंने पोस्ट किया था पर लोग अच्छे काम की सराहना करना नहीं जानते । खुद अच्छा करने की सोचते नही और कोई दूसरा कर रहा हो तो उसे प्रोत्साहित भी नहीं करते। इतनी कंजूसी कोस लिए ? दिल खोल कर सराहना करिये ऐसे लोगो की जो बेहतर कल चाहते है और इंसानियत के लिए कुछ करते है .. धन्यवाद महेंद्र जी 💐💐

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