Sunday, June 20, 2021
ईश्वर की कल्पना कैसे उत्पन्न हुई?
ईश्वर की कल्पना कैसे उत्पन्न हुई?
(1) हम नास्तिक लोग कहते हैं कि ईश्वर नहीं है, सिर्फ ईश्वर की कल्पना है। मनुष्य ने खुद कल्पना करके ईश्वर बनाया है। लेकिन ये कल्पना कब की? क्यों की? और मनुष्य के दिमाग में ऐसा खयाल आया कैसे?
(2) पांच दस हजार पूर्व हमारे पूर्वज का दिमाग विकसित हो चूका था। जिज्ञासा भी थी लेकिन उसके पास ज्ञान प्राप्त करने के साधन सिमित थे। सत्य तक पहुंचने की क्षमता कम थी।
(3) जीवन कठिन था। पुर, भूकंप, बारिश, चक्रवात, ठंड, गर्मी, बिमारी, भूख, दर्द, म्रृत्यु का उसके पास कोई उपाय नहीं था। नदी, पर्वत, सूर्य, चंद्र और जंगली जानवरों से वो डरता था।
(4) तब हमारे पूर्वज ने ईश्वर की कल्पना की। अगर कोई व्यक्ति कल्पना करेगा तो उसने जो देखा है उसके मुताबिक ही कल्पना करेगा। हमारे पूर्वज ने अपनी समझ के अनुसार कल्पना की। उसने देखा हमारे कबीले का संचालन करने वाला कोई सरदार है उसी तरह दुनिया को चलाने वाला भी कोई होना चाहिए।
(5) कबीले के सरदार को बिनती करो तो वो समस्याओं का उपाय करता है उसी तरह ईश्वर भी प्रार्थना करने से हमारी समस्याओं का समाधान करेगा। कबीले का सरदार मान सम्मान, खुशामद और भेट सौगात से खुश होता है इसी तरह मान सम्मान, खुशामद और भेट सौगात से ईश्वर भी खुश होगा। आरती और स्तुति क्या है? खुशामद ही है। प्रसाद और चढ़ावा एक प्रकार की भेट सौगात (रिश्वत) ही है।
(6) जैसे कबीले का सरदार नाराज होता है तो सजा देता है उसी तरह ईश्वर भी नाराज हो जायेगा तो सजा देगा और इसलिए ईश्वर से डरना चाहिए ऐसी कल्पना की गई। ईश्वर को खुश करने के लिए पूजा करने की शुरुआत हुई।
(7) राजशाही शुरू होने के बाद राजा और उसके सलाहकारों (पुरोहित, पादरी, मौलवी) ने अपने लाभ के लिए इस डर का इस्तेमाल किया। जनता में कुछ लोग थे जो राजा से नहीं डरते थे। उनको कहा कि राजा ईश्वर का प्रतिनिधि हैं, उसकी आज्ञा का पालन नहीं करोगे तो ईश्वर दंड देगा। ईश्वर उपर से सब देखता है (जैसे सबसे बड़ा सीसीटीवी कैमरा) इसलिए हर धर्म में भक्त लोग प्रार्थना या इबादत करते वक्त उपर देखते हैं।
(8) इस तरह ईश्वर अल्लाह गोड सिर्फ़ एक कल्पना है। और कुछ नहीं है। ईश्वर से डरना छोडिये। आपको कुछ नहीं होगा। ईश्वर को छोडने कुछ पाप होगा तो वो पाप मेरे।
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